जोधपुर हाईकोर्ट से आसाराम बापू को 20 दिन की प्रथम पैरोल, राज्य सरकार के आदेश को किया निरस्त

जोधपुर हाईकोर्ट से आसाराम बापू को 20 दिन की प्रथम पैरोल, राज्य सरकार के आदेश को किया निरस्त

जोधपुर : राजस्थान हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने डी.बी. सिविल रिट याचिका संख्या 14497/2026 में महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए आसाराम उर्फ आशुमल को 20 दिनों की प्रथम पैरोल पर रिहा करने का निर्देश दिया है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा एवं न्यायमूर्ति संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने यह आदेश उस रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें जिला पैरोल समिति द्वारा 20 दिन की पैरोल का आवेदन निरस्त किए जाने को चुनौती दी गई थी।

राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि जिला पैरोल समिति ने 31 जुलाई 2026 की बैठक में पैरोल आवेदन इस आधार पर खारिज किया था कि पुलिस ने आशंका व्यक्त की है कि याचिकाकर्ता फरार हो सकता है। साथ ही यह भी कहा गया कि गुजरात के गांधीनगर में दर्ज एक अन्य आपराधिक मामले में दोषसिद्धि होने के कारण वह राजस्थान कैदी पैरोल रिहाई नियम, 1958 के नियम 14(क) के तहत पैरोल का पात्र नहीं है। इसके अतिरिक्त चिकित्सा आधार पर भी कोई प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं होने तथा शिकायतकर्ता के परिवार को खतरे की आशंका का हवाला दिया गया।

खंडपीठ ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध तथ्यों का अवलोकन करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता लगभग 13 वर्ष, 1 माह और 24 दिन की सजा काट चुका है तथा पूर्व में उसे अंतरिम जमानत पर रिहा किया जा चुका है। न्यायालय ने पाया कि जमानत के दुरुपयोग, फरार होने अथवा समाज और गवाहों के लिए खतरा उत्पन्न करने का कोई उदाहरण रिकॉर्ड पर नहीं है। इसलिए इस प्रकार की आशंकाओं को न्यायालय ने निराधार माना।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी टिप्पणी की कि सामान्यतः पैरोल समितियां बिना किसी ठोस उदाहरण के समान प्रकार के आधारों पर पैरोल आवेदन अस्वीकार कर देती हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि राजस्थान की सजा से संबंधित पैरोल का निर्णय राजस्थान के कानूनों के अनुसार होगा तथा यदि किसी अन्य राज्य में कोई अलग आपराधिक मामला है, तो उस राज्य का कानून अपने अनुसार कार्य करेगा।

याचिकाकर्ता की आयु लगभग 87 वर्ष तथा लंबी अवधि की कारावास को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने उसे 20 दिनों की प्रथम पैरोल पर रिहा करने का आदेश दिया। न्यायालय ने निर्देश दिया कि ₹50,000 के निजी मुचलके तथा ₹25,000-₹25,000 के दो सक्षम जमानतदार प्रस्तुत करने के बाद सामान्य नियमों एवं शर्तों के अधीन पैरोल का लाभ दिया जाए। साथ ही केंद्रीय कारागार, जोधपुर के अधीक्षक को आवश्यक अतिरिक्त शर्तें निर्धारित करने की स्वतंत्रता भी दी गई है।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पैरोल की अवधि की गणना वास्तविक रिहाई की तिथि से की जाएगी। इसके साथ ही रिट याचिका तथा सभी लंबित आवेदन निस्तारित कर दिए गए।